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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: अरुणाचल के 126 सीमावर्ती गांवों को 1,022 किमी सड़कें, 2,205 करोड़ मंजूर

अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 126 सीमावर्ती गांवों को जोड़ने के लिए 1,022 किमी सड़कों को मंजूरी दी है। 2,205 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से दूरदराज के सीमांत समुदायों तक पहुंच बेहतर होगी।

अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज के सीमावर्ती गांवों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य कैबिनेट ने केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 126 सीमावर्ती गांवों को जोड़ने के लिए 1,022 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इन सड़क परियोजनाओं पर कुल 2,205 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

यह फैसला राज्य की सीमा अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश चीन, भूटान और म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, और इसके कई सीमांत गांव आज भी पक्की सड़कों से नहीं जुड़े हैं। कठिन पहाड़ी भूभाग के कारण इन इलाकों में सड़क निर्माण हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।

कैबिनेट के फैसले की मुख्य बातें

राज्य कैबिनेट की बैठक में जारी विज्ञप्ति के अनुसार, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के पहले चरण में राज्य के 11 जिलों के कुल 455 गांवों का चयन किया गया था। अब दूसरे चरण में म्यांमार और भूटान सीमा से लगे 122 अतिरिक्त गांवों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य दुर्गम सीमांत समुदायों तक पहुंच में सुधार करना है, जहां कठिन भूभाग और सीमित संपर्क के कारण स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच अक्सर बाधित रहती है। बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन, स्थानीय व्यवसायों और आजीविका के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अधिकारियों के अनुसार, इन सड़कों के निर्माण में स्थानीय भू-भाग की चुनौतियों को ध्यान में रखा जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का असर कम से कम हो।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम क्या है

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-1 को केंद्र सरकार ने फरवरी 2023 में मंजूरी दी थी। यह कार्यक्रम भारत की उत्तरी सीमा से लगे चुनिंदा गांवों पर केंद्रित है। अरुणाचल प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड भी इस कार्यक्रम में भागीदार राज्य हैं, जबकि लद्दाख भी इसके दायरे में आता है।

सड़क निर्माण के अलावा, इस कार्यक्रम में ग्रामीण अवसंरचना, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कौशल विकास, पर्यटन और आजीविका सृजन शामिल हैं। इसका लक्ष्य सीमावर्ती बस्तियों में जीवन स्तर में सुधार करना और ऐसे आर्थिक अवसर पैदा करना है जो निवासियों को अपने गांवों में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करें।

कार्यक्रम की एक खास बात यह है कि यह केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। इसमें सीमांत गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों के विपणन, और युवाओं के लिए कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है।

सीमांत क्षेत्रों के लिए क्यों अहम

अरुणाचल प्रदेश के सीमांत इलाकों में संपर्क एक बड़ी चुनौती रही है। बरसात के मौसम में कई गांव हफ्तों तक कटे रहते हैं, जिससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कत होती है।

तवांग, अंजॉ, दिबांग घाटी और चांगलांग जैसे जिलों के कई गांवों में आज भी सड़क संपर्क न होने से लोग पैदल घंटों का सफर तय करते हैं। सर्दियों में बर्फबारी के कारण स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सड़कों के बनने से न केवल आम लोगों का जीवन आसान होगा, बल्कि सुरक्षा बलों की आवाजाही भी बेहतर होगी, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सीमा पर तैनात जवानों तक रसद पहुंचाने में भी इन सड़कों से मदद मिलेगी।

स्थानीय लोगों की उम्मीदें

सीमावर्ती गांवों के निवासियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से उनके बच्चे आसानी से स्कूल जा सकेंगे और बीमार लोगों को समय पर इलाज मिल सकेगा। किसानों को भी अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी।

हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि घोषणाएं तो पहले भी हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम धीमा रहता है। उन्होंने सरकार से इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की है।

आगे की राह

सड़क परियोजनाओं की मंजूरी के बाद अब इनके क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण में अक्सर भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और कठिन मौसम जैसी चुनौतियां आती हैं। राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का भरोसा जताया है।

सीमावर्ती गांवों के निवासियों के लिए यह फैसला नई उम्मीद लेकर आया है। अगर ये सड़कें समय पर बनती हैं, तो अरुणाचल के दूरदराज के गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और पलायन की समस्या पर भी अंकुश लगेगा।

Keshav Pathak

Written by

Keshav Pathak

Covering Arunachal Pradesh, the Northeast and beyond for Abotani TV.