अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख व्यक्तित्वों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने तीन शिक्षण संस्थानों का नाम दिवंगत डोंगलो सोनम, लेफ्टिनेंट पुंजी मारा और पोपक बागे के नाम पर रखने की मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन तीनों हस्तियों की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए मान्यता मिलनी चाहिए। किसी संस्थान का नाम बदलना राज्य द्वारा दिया जाने वाला सबसे स्थायी सार्वजनिक सम्मानों में से एक है — यह नाम दशकों तक छात्रों, शिक्षकों और समुदायों की दैनिक शब्दावली में बस जाता है।
तीन हस्तियां, तीन कहानियां
कैबिनेट के फैसले में प्रत्येक सम्मानित व्यक्ति को एक विशिष्ट शिक्षण संस्थान से जोड़ा गया है, हालांकि संस्थानों के नामों का खुलासा घोषणा में नहीं किया गया।
लेफ्टिनेंट पुंजी मारा के नाम में सैन्य उपाधि शामिल होने से संकेत मिलता है कि तीनों में से कम से कम एक का रक्षा सेवाओं से संबंध था, जो इस फैसले को नागरिक आयाम के साथ-साथ देशभक्ति का आयाम भी देता है। डोंगलो सोनम और पोपक बागे सामुदायिक या जनसेवा के क्षेत्र की हस्तियां मानी जा रही हैं, जिनके योगदान को राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से मान्यता दी है।
सार्वजनिक सम्मान की परंपरा
शिक्षण संस्थानों का नामकरण महापुरुषों और समाजसेवियों के नाम पर करने की परंपरा भारत में लंबे समय से चली आ रही है। इससे युवा पीढ़ी को इन हस्तियों के जीवन और कार्यों से प्रेरणा मिलती है।
अरुणाचल प्रदेश में यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। नामकरण के साथ-साथ इन संस्थानों के विकास पर भी ध्यान देने की उम्मीद जताई जा रही है।
समुदाय में स्वागत
इस फैसले का संबंधित समुदायों में स्वागत किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अपने बीच के नायकों को इस तरह का सम्मान मिलना गर्व की बात है। राज्य सरकार ने कहा है कि भविष्य में भी समाज के लिए योगदान देने वाली हस्तियों को इसी तरह सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह के फैसले स्थानीय इतिहास और संस्कृति को पाठ्यक्रम से जोड़ने में मदद करते हैं। जब छात्र अपने ही समुदाय के नायकों के नाम वाले संस्थानों में पढ़ते हैं, तो उनमें अपनी जड़ों के प्रति गर्व की भावना बढ़ती है।
तीनों हस्तियों का परिचय
डोंगलो सोनम, लेफ्टिनेंट पुंजी मारा और पोपक बागे — ये तीनों नाम अरुणाचल प्रदेश के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
लेफ्टिनेंट पुंजी मारा ने देश की सेवा में अपना योगदान दिया। सैन्य सेवा में रहते हुए उन्होंने जो साहस और समर्पण दिखाया, वह युवाओं के लिए प्रेरणा है। शहीदों के नाम पर संस्थानों का नामकरण उनकी कुर्बानी को अमर बनाने का एक तरीका है।
डोंगलो सोनम और पोपक बागे ने सामुदायिक सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उनके प्रयासों से कई लोगों का जीवन बेहतर हुआ।
शिक्षा में स्थानीय नायकों का महत्व
शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्यक्रम में स्थानीय नायकों को शामिल करने से छात्रों में अपनी संस्कृति और इतिहास के प्रति गर्व की भावना बढ़ती है। जब बच्चे अपने ही समुदाय के महापुरुषों के बारे में पढ़ते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे भी बड़ा काम कर सकते हैं।
यह फैसला अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में भी एक कदम है।
नामकरण समारोह की तैयारी
सरकार की ओर से इन संस्थानों के नामकरण के लिए विशेष समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन समारोहों में संबंधित हस्तियों के परिजनों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नामकरण के साथ-साथ संस्थानों के नामपट्ट और आधिकारिक दस्तावेजों में भी बदलाव किया जाएगा। इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।













