राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को राजनीतिक हलचल चरम पर रही, जब INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कहा कि पूरे देश में मतदाता सूचियों के विवादास्पद संशोधन के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। विपक्ष का आरोप है कि चुनावों में भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, हालांकि चुनाव आयोग ने इस आरोप से इनकार किया है।
कौन-कौन शामिल
मार्च में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसके अलावा भाकपा (मार्क्सवादी), भाकपा, राजद, राकांपा (शरद पवार गुट), नेशनल कॉन्फ्रेंस और केरल के कई दलों के नेता भी इस विरोध में शामिल थे।
कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए हैं और वे अब रुकने वाले नहीं हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता संदीप देशपांडे ने भी इस विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मार्च से पहले संसद मार्ग थाने के बाहर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। दिल्ली के छह प्रमुख मेट्रो स्टेशनों — राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय और पटेल चौक सहित — को सुरक्षा कारणों से दोपहर 4 बजे तक प्रवेश और निकास के लिए बंद रखा गया।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए और मेट्रो-रेल सेवाएं सामान्य रहनी चाहिए।
CJI ने बैठक का अनुरोध ठुकराया
इससे पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के मिलने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने विचाराधीन कार्यवाही और संवैधानिक शक्तियों के पृथक्करण का हवाला दिया।
केरल विधानसभा में भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला एक वैधानिक प्रस्ताव लाया गया है। यह मुद्दा अब संसद से लेकर सड़क तक और अदालत से लेकर विधानसभाओं तक फैल चुका है।
पत्रकारों पर कार्रवाई का आरोप
वहीं, सप्ताहांत में दिल्ली में हुए युवा नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स सहित कई मीडिया संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरे की चेतावनी दी है।
लगभग तीन दर्जन पत्रकारों को घंटों तक हिरासत में रखा गया था, जिनमें इंडियन एक्सप्रेस, स्क्रॉल और न्यूजलॉन्ड्री के पत्रकार शामिल थे।
आरोपों का विवरण
सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने सरकारी तबादलों और नियुक्तियों में अनुचित प्रभाव डाला। इसके अलावा निविदा प्रक्रियाओं और नीतिगत फैसलों में भी हस्तक्षेप के आरोप हैं।
राजबीर सिंह घुमन मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी के रूप में एक प्रभावशाली पद पर थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित किया।
राजनीतिक इतिहास
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है। आप ने भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा किया था, लेकिन अब उसके ही अधिकारियों पर आरोप लग रहे हैं।
विपक्षी दलों — कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल — ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए हैं। उनका कहना है कि यह सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों की पोल खोलता है।













