मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने उच्च और तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, संकट में फंसी महिलाओं के लिए सहायता बढ़ाने और प्रशासनिक ढांचे को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कैबिनेट ने सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में शिक्षण और तकनीकी पदों के लिए एकसमान और योग्यता-आधारित भर्ती नियमों को मंजूरी दी है।
तकनीकी शिक्षा में एकरूपता
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) विनियम, 2019 के अनुरूप 12 श्रेणियों के पदों के लिए भर्ती नियमों को मंजूरी दी गई है। इससे राज्य के तकनीकी शिक्षा संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता और निरंतरता आने की उम्मीद है।
अधिकारी ने कहा कि भर्ती नियमों को AICTE विनियमों के अनुरूप बनाने से इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों का संस्थागत ढांचा मजबूत होगा और नियुक्तियां निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
मुख्यमंत्री खांडू ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस फैसले की घोषणा करते हुए इसे पारदर्शी, योग्यता-आधारित भर्ती और मजबूत तकनीकी शिक्षा की दिशा में एक कदम बताया।
महिला हेल्पलाइन-181 को मजबूती
संकट और आपात स्थिति का सामना कर रही महिलाओं की सहायता को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने मिशन शक्ति के दिशानिर्देशों के अनुसार महिला हेल्पलाइन-181 योजना के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी।
महिला हेल्पलाइन-181 एक टोल-फ्री, चौबीसों घंटे उपलब्ध सेवा है, जो संकट में फंसी महिलाओं को आपात सहायता और त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करती है। यह हेल्पलाइन सहायता की आवश्यकता वाली महिलाओं को चिकित्सा देखभाल, आश्रय, कानूनी सहायता, भावनात्मक समर्थन और मार्गदर्शन जैसी आवश्यक सेवाओं से जोड़ती है।
पहाड़ी राज्य में महिलाओं के लिए इस तरह की सेवा का विशेष महत्व है, क्योंकि दूरदराज के इलाकों में मदद तक पहुंचना अक्सर मुश्किल होता है।
स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ग्रेड पे बढ़ोतरी
कैबिनेट ने राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के ग्रेड पे में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने इसे अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के योगदान की मान्यता बताया, जो राज्य के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में काम करते हैं।
बेहतर वेतनमान से कर्मचारियों के पदों पर बने रहने की संभावना बढ़ती है — यह पूर्वोत्तर राज्यों में एक पुरानी चुनौती रही है, जहां विशेषज्ञ और कार्यक्रम-विशिष्ट कर्मचारियों की कमी से दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणाम प्रभावित होते रहे हैं।
तीन संस्थानों का नामकरण
कैबिनेट ने तीन शिक्षण संस्थानों का नाम दिवंगत डोंगलो सोनम, लेफ्टिनेंट पुंजी मारा और पोपक बागे के नाम पर रखने का भी फैसला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन हस्तियों की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए मान्यता मिलनी चाहिए।
जन-केंद्रित शासन का दावा
मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि कैबिनेट की बैठक जन-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आयोजित की गई, जिसमें हर फैसले का नागरिकों के जीवन में सार्थक और ठोस बदलाव लाना लक्ष्य रखा गया। सीमांत राज्य के लिए यह प्रतिबद्धता अहम मानी जा रही है, जहां नीति और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को पाटना एक बड़ी चुनौती रही है।
तकनीकी शिक्षा की चुनौतियां
अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में तकनीकी शिक्षा के सामने कई चुनौतियां हैं। योग्य शिक्षकों की कमी, प्रयोगशालाओं का अभाव और उद्योगों से दूरी इनमें प्रमुख हैं।
एकरूप भर्ती नियमों से इन चुनौतियों से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है। जब भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता-आधारित होगी, तो अच्छे शिक्षक इन संस्थानों में आने के लिए प्रेरित होंगे।
शिक्षाविदों का कहना है कि तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भर्ती के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में भी निवेश जरूरी है। आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और इंटरनेट सुविधा के बिना तकनीकी शिक्षा अधूरी है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
एकरूप भर्ती नियमों से सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता में होगा। पहले अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाते थे, जिससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय की आशंका रहती थी। अब सभी संस्थानों में एक ही मानदंड लागू होगा।
इससे भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद की गुंजाइश भी कम होगी और मेधावी युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।













