अरुणाचल प्रदेश में पेशेवर मुक्केबाजी को नई ऊंचाई देने की तैयारी जोरों पर है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अरुणाचल प्रो बॉक्सिंग नाइट की चैंपियनशिप बेल्ट का अनावरण किया है, जो राज्य में मुक्केबाजी के बढ़ते कद का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं बेल्ट का अनावरण करना यह संकेत देता है कि यह कोई सामान्य स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि राज्य सरकार के समर्थन वाला एक बड़ा प्रयास है, जिसका लक्ष्य अरुणाचल प्रदेश को राष्ट्रीय मुक्केबाजी मानचित्र पर स्थापित करना है।
15 अक्टूबर को फाइट नाइट
अरुणाचल प्रो बॉक्सिंग फाइट नाइट का आयोजन 15 अक्टूबर को होगा। इसमें दो IBC (इंटरनेशनल बॉक्सिंग काउंसिल) मान्यता प्राप्त खिताबी मुकाबले होंगे — IBC इंडिया टाइटल और IBC स्टेट टाइटल।
IBC एक मान्यता प्राप्त संस्था है जो पेशेवर मुक्केबाजी के खिताबी मुकाबलों को मान्यता देती है। इसके बेल्ट जीतने वाले मुक्केबाजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग अंक और मान्यता मिलती है। पेशेवर मुक्केबाजी में IBC खिताब जीतना किसी भी मुक्केबाज के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
आयोजन में कई मुकाबले होंगे, लेकिन सबकी नजरें दो खिताबी मुकाबलों पर टिकी होंगी। भाग लेने वाले मुक्केबाजों ने महीनों से इस आयोजन की तैयारी की है।
अरुणाचल और मुक्केबाजी का रिश्ता
अरुणाचल प्रदेश का मुक्केबाजी, कुश्ती और मार्शल आर्ट्स जैसे खेलों से गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है। राज्य ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले कई एथलीट पैदा किए हैं। इस स्तर की पेशेवर फाइट नाइट स्थानीय मुक्केबाजों के लिए एक बड़ा मंच प्रदान करेगी।
पूर्वोत्तर भारत ने देश को कई चैंपियन मुक्केबाज दिए हैं। मैरी कॉम जैसे दिग्गजों ने इस क्षेत्र की मुक्केबाजी परंपरा को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। अरुणाचल के युवा मुक्केबाज भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
युवा मुक्केबाजों के लिए IBC बेल्ट राष्ट्रीय पेशेवर सर्किट में प्रवेश का एक प्रतिष्ठित माध्यम है। राज्य में इस तरह के आयोजन से न केवल खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी, बल्कि खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की खेल नीति
मुख्यमंत्री खांडू का इस आयोजन से सीधे जुड़ना राज्य सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें बड़े खेल आयोजनों के जरिए राज्य की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर उभारा जा रहा है। इससे दर्शकों की आवाजाही बढ़ेगी और अरुणाचल को एक सक्रिय, आगे बढ़ते सीमांत राज्य के रूप में प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में खेल बुनियादी ढांचे में भी निवेश बढ़ाया है। नए स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और खेल छात्रावास बनाए जा रहे हैं ताकि युवा प्रतिभाओं को सही मार्गदर्शन मिल सके।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर में मुक्केबाजी की प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ सही मंच और अवसरों की। अरुणाचल प्रो बॉक्सिंग नाइट जैसे आयोजन इसी खाई को पाटने का काम करेंगे।
युवा मुक्केबाजों में उत्साह
राज्य के युवा मुक्केबाजों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह है। कई युवा खिलाड़ियों का कहना है कि अपने ही राज्य में इस स्तर का आयोजन देखना उनके लिए सपने जैसा है। इससे उन्हें बड़े मंच पर खेलने की प्रेरणा मिलेगी।
प्रशिक्षकों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय मुक्केबाजों को राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा का मौका मिलता है, जिससे उनका खेल निखरता है।
किसके सिर सजेगा ताज
बेल्ट तैयार हैं और मुक्केबाजों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 15 अक्टूबर की रात यह तय होगा कि IBC इंडिया टाइटल और IBC स्टेट टाइटल किसके नाम होंगे। राज्य के खेल प्रेमियों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर में प्रो बॉक्सिंग का भविष्य
अरुणाचल प्रो बॉक्सिंग नाइट जैसे आयोजन पूर्वोत्तर में पेशेवर मुक्केबाजी के भविष्य के लिए शुभ संकेत हैं। इस क्षेत्र में मुक्केबाजी की प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन पेशेवर मंचों की कमी हमेशा से एक बाधा रही है।
मैरी कॉम, शिव थापा और लवलीना बोर्गोहेन जैसे मुक्केबाजों ने पूर्वोत्तर की मुक्केबाजी परंपरा को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। अब जरूरत है कि इस परंपरा को पेशेवर स्तर पर आगे बढ़ाया जाए।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के आयोजन नियमित रूप से होते रहे, तो पूर्वोत्तर भारत पेशेवर मुक्केबाजी का केंद्र बन सकता है।













