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नासिक कुंभ स्थल के पास भूजल में कैंसरकारी रसायन, रिपोर्ट में खुलासा

नासिक कुंभ मेला स्थल के पास भूजल में हेक्सावैलेंट क्रोमियम का उच्च स्तर पाया गया है। SANDRP की रिपोर्ट में स्वतंत्र जल परीक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की मांग की गई है।

महाराष्ट्र के नासिक में कुंभ मेला स्थल के पास भूजल में कैंसर से जुड़े एक खतरनाक रसायन के उच्च स्तर पाए जाने की रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) की रिपोर्ट के अनुसार, भूजल में हेक्सावैलेंट क्रोमियम का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया है।

हेक्सावैलेंट क्रोमियम क्रोमियम का एक विषैला रूप है, जो सुरक्षित सीमा से अधिक संपर्क में आने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

SANDRP की रिपोर्ट में स्वतंत्र जल-गुणवत्ता परीक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और पारदर्शी जन-स्वास्थ्य परामर्श के महत्व पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संदूषण की सीमा और आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई तय करने के लिए आगे आधिकारिक आकलन जरूरी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करके उन्हें नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि भूजल की गुणवत्ता में और गिरावट न आए।

कुंभ मेले के लिए चिंता

नासिक कुंभ मेला भारत के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक है, जिसमें लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मेले के दौरान पानी की भारी मांग होती है, और भूजल संदूषण श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। क्रोमियम का स्रोत अक्सर चमड़ा, रंग और धातु उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट होता है।

गोदावरी नदी के तट पर स्थित नासिक में कुंभ मेले का आयोजन होता है। नदी के पानी की गुणवत्ता भी इस संदूषण से प्रभावित हो सकती है।

स्वास्थ्य जोखिम

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हेक्सावैलेंट क्रोमियम के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा संबंधी समस्याएं, श्वसन तंत्र की बीमारियां और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। दूषित पानी के सेवन से पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी हेक्सावैलेंट क्रोमियम को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना है और इसके लिए सुरक्षित सीमा निर्धारित की है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

रिपोर्ट के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग उठ रही है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था की जाए और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कार्रवाई हो।

SIR विवाद की पृष्ठभूमि

मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध करना है। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाना, स्थानांतरित मतदाताओं के पते अद्यतन करना और डुप्लिकेट प्रविष्टियां हटाना शामिल है।

लेकिन इस बार विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि चुनिंदा इलाकों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

संवैधानिक प्रक्रिया का विस्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में विशेष प्रक्रिया निर्धारित है। अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के बाद ही हटाया जा सकता है।

यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।

केरल विधानसभा का प्रस्ताव इस संवैधानिक प्रक्रिया की दिशा में पहला कदम है, हालांकि अंतिम फैसला संसद को ही करना होगा।

जांच की मांग

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करके दोषी उद्योगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की है कि प्रभावित इलाकों के निवासियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।

Keshav Pathak

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Keshav Pathak

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