Mon, 12 Oct, 2026|Arunachal Pradesh’s Digital News Portal

दिल्ली-NCR में भारी बारिश और आंधी, कई इलाकों में जलभराव; IMD का पूर्वानुमान

दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह भारी बारिश और गरज के साथ तेज हवाओं ने मौसम बदल दिया। कई इलाकों में जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ। IMD ने अगले दिनों के लिए तापमान का पूर्वानुमान जारी किया।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सोमवार की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश और गरज के साथ तेज हवाओं ने लोगों को चौंका दिया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

सुबह की बारिश से कई इलाकों में जलभराव हो गया, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर यातायात धीमा हो गया और कुछ मार्गों पर लंबा जाम लग गया।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

IMD के अनुसार, 13 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि 14 अक्टूबर को यह थोड़ा बढ़कर 33-35 डिग्री सेल्सियस हो सकता है। न्यूनतम तापमान अगले कुछ दिनों में 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थिर रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने पहले अगले छह दिनों में दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और बारिश न होने का पूर्वानुमान जताया था, लेकिन सोमवार सुबह की बारिश ने इस पूर्वानुमान को चुनौती दी।

मानसून की विदाई का समय

अक्टूबर का महीना मानसून की वापसी का समय होता है। इस दौरान उत्तर भारत से दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे विदा लेता है, लेकिन कभी-कभी सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण अचानक भारी बारिश हो जाती है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र इस तरह की अचानक बारिश का कारण बनते हैं। पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करते हैं।

जलभराव की समस्या

दिल्ली में हर बार की तरह इस बार भी भारी बारिश के बाद कई निचले इलाकों में पानी भर गया। नगर निगम के दावों के बावजूद जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि अनियोजित शहरीकरण और नालों पर अतिक्रमण जलभराव के मुख्य कारण हैं। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है।

प्रदूषण पर असर

बारिश से दिल्ली की हवा में थोड़ी राहत मिली है। मानसून के बाद का समय दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है, और बारिश प्रदूषकों को धोने में मदद करती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अस्थायी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में पराली जलाने और वाहनों के धुएं से प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ने की आशंका है।

क्रोमियम प्रदूषण के स्रोत

हेक्सावैलेंट क्रोमियम का मुख्य स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट है। चमड़ा कमाने, रंग-रोगन, धातु प्रसंस्करण और इलेक्ट्रोप्लेटिंग जैसे उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट में यह रसायन पाया जाता है।

नासिक औद्योगिक क्षेत्र में कई ऐसे उद्योग हैं जो क्रोमियम का उपयोग करते हैं। अगर इनके अपशिष्ट का सही तरीके से निपटान नहीं होता, तो यह भूजल में मिल जाता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों के पास भूजल की नियमित निगरानी होनी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन उद्योगों के अपशिष्ट निपटान की सख्त निगरानी करनी चाहिए।

अन्य कुंभ स्थलों की स्थिति

भारत में चार जगहों — प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन — में कुंभ मेले का आयोजन होता है। इन सभी जगहों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सभी कुंभ स्थलों के आसपास जल गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए। श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए यह जरूरी है।

स्वास्थ्य पर असर

अचानक मौसम बदलने से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के मौसम में सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार के मामले बढ़ जाते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बारिश में भीगने से बचें और गर्म कपड़े पहनें।

नागरिकों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। अगर यात्रा जरूरी हो तो मौसम की जानकारी लेकर ही निकलें।

आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा है।

Keshav Pathak

Written by

Keshav Pathak

Covering Arunachal Pradesh, the Northeast and beyond for Abotani TV.